2026 में MGNREGA में बड़े बदलाव — एक गहन समीक्षा
भारत सरकार ने देश के सबसे बड़े ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम MGNREGA 2026 को सुधार कर नया स्वरूप देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। 2005 में लागू हुए इस अधिनियम ने वर्षों तक भारत के ग्रामीण गरीबों को 100 दिनों तक नौकरी की गारंटी दी, लेकिन 2025-26 के अंत में संसद ने इसे VB-G RAM G Act, 2025 के रूप में बदल दिया है। इसे Viksit Bharat–Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) एक्ट भी कहा जाता है।
यह बदलाव सिर्फ योजना का नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके ढांचे, कार्यान्वयन, वित्त पोषण, रोजगार के अधिकार और ग्रामीण विकास के मॉडल में गहन परिवर्तन किये जा रहे हैं।

MGNREGA से VB-G RAM G तक — क्या बदला?
1. नाम और कानूनी रूपांतरण
अब MGNREGA को एक नए कानूनी ढांचे में पुनर्गठित किया गया है और इसका नाम रखा गया है:
VB-G RAM G Act, 2025
(Viksit Bharat–Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission – Gramin)
सरकार का कहना है कि यह भारतीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों को अधिक योजनाबद्ध, समन्वित और 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप बनाएगा।
2. रोज़गार दिनों की संख्या में वृद्धि
MGNREGA में अब तक ग्रामीण परिवारों को कम से कम 100 दिनों का रोजगार दिया जाता था।
नई VB-G RAM G स्कीम में यह 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी दी जा रही है।
आंकड़ा:
हालांकि MGNREGA के तहत औसत रोजगार केवल लगभग 50-55 दिनों तक ही मिलता रहा है वास्तविक रूप से, यह बदलाव प्रतीकात्मक रूप से रोजगार अवधि बढ़ाने की दिशा में है।
3. बजटीय और वित्तीय परिवर्तन
MGNREGA के पुराने ढांचे में:
मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार द्वारा किया जाता था।
सामग्री लागत का 75% केंद्र वहन करता था और 25% राज्य को देना पड़ता था।
लेकिन VB-G RAM G में:
🔹 केंद्र और राज्यों के बीच खर्च का अनुपात 60:40 रखा गया है।
🔹 कुछ विशेष राज्यों (जैसे पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों) के लिए यह 90:10 शामिल रहेगा।
इसका अर्थ यह है कि राज्यों की वित्तीय जिम्मेदारी बढ़ गई है, जिससे राज्य सरकारें अपनी आमदनी और योजनाओं को बेहतर तरीके से संरेखित करेंगी।
4. प्रायोरिटी क्षेत्रों में बदलाव
VB-G RAM G योजना में रोजगार को केवल रोज़गार देने के अलावा ग्रामीण बुनियादी ढांचे का विकास जोड़ दिया गया है।
मुख्य क्षेत्रों में शामिल हैं:
🔹 जल सुरक्षा और जल स्रोतों का प्रबंधन
🔹 ग्रामीण बुनियादी संरचना निर्माण
🔹 आजीविका संबंधित ढांचे का विकास
🔹 चरम मौसम के प्रतिकूल प्रभावों से निपटने वाले कार्यों का संशोधन
ये बदलाव रोजगार को टिकाऊ और दीर्घकालिक लाभ-दायक कार्यों के साथ जोड़ते हैं।
5. कृषि सीज़न के दौरान कार्य अवधि में “ठहराव”
VB-G RAM G अधिनियम में एक अनोखा प्रावधान है:
🔸 साल में कुल 60 दिनों तक रोजगार कार्यक्रम को “ब्रेक” किया जा सकता है, खासकर बीजारोपण और कटाई के मौसम में, ताकि कृषि कार्य में ग्रामीण श्रमिक उपलब्ध रह सकें।
यह बदलाव ऐसा माना जाता है कि इससे कृषि श्रमिकों को खेती के सीज़न में समस्या नहीं होगी।
6. भुगतान प्रक्रिया में सुधार
पुराने MGNREGA ढांचे में मजदूरी भुगतान में विलंब एक आम समस्या थी।
✨ नए VB-G RAM G में:
🔹 साप्ताहिक भुगतान का प्रस्ताव है, जिससे मजदूरों को जल्द भुगतान मिल सकेगा।
🔹 डिजिटल सत्यापन और तकनीकी निगरानी मजबूत की जाएगी।
महत्वपूर्ण आँकड़े
| विषय | आंकड़ा या तथ्य |
|---|---|
| MGNREGA के तहत अब तक कुल खर्च | लगभग ₹9.95 लाख करोड़ (2005-2025) |
| 2025-26 के लिए केंद्रीय अनुमानित आवंटन | लगभग ₹86,000 करोड़ |
| नए VB-G RAM G के लिए अनुमानित केंद्र का हिस्सा | लगभग ₹95,692 करोड़ |
| रोजगार दिनों की गारंटी (पुराना) | 100 दिन |
| रोजगार दिनों की गारंटी (नई) | 125 दिन |
| राज्यों की साझा वित्तीय भागीदारी | 60:40 अनुपात |
विवाद और आलोचना
MGNREGA की नई रूपांतरण के फैसले पर कई आलोचनाएँ और विरोध भी सामने आए हैं:
विपक्ष और कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह परिवर्तन समस्याओं का समाधान नहीं करता और इससे रोजगार का अधिकार कमजोर होगा।
कुछ राज्यों और दलों ने इसे अदालत में चुनौती देने की भी योजना बनाई है।
“मनरेगा बचाओ” आंदोलन जैसी चल रही विरोध-आंदोलनें इसके खिलाफ हैं।
इसके अलावा यह चिंता की बात है कि अधिक खर्च का बोझ राज्यों पर डालने से कमज़ोर गरीब राज्यों में रोजगार मिलना कठिन हो सकता है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1. MGNREGA अब समाप्त हो गया क्या?
➡️ जी हाँ, VB-G RAM G Act, 2025 के लागू होने के बाद MGNREGA का मूल कानून बदलकर नया framework लागू कर दिया गया है।
Q2. क्या अब भी ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा?
➡️ हाँ, रोजगार की संख्या अब 125 दिनों तक बढ़ाई गई है, लेकिन यह अब एक निश्चित राष्ट्रीय अधिकार के बजाय वित्तीय आवंटन के आधार पर उपलब्ध होगा।
Q3. राज्यों की भूमिका क्या बदल गई?
➡️ पहले योजना का ज्यादातर खर्च केंद्र वहन करता था, लेकिन अब राज्यों को खर्च का हिस्सा देना होगा, जिससे उनकी ज़िम्मेदारी बढ़ गई है।
Q4. मजदूरी का भुगतान कैसे होगा?
➡️ नई योजना में साप्ताहिक भुगतान और तेज DBT प्रणाली लाने की योजना है।
Q5. क्या यह बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाएगा?
➡️ यह विवादास्पद है। समर्थकों का मानना है कि यह बेहतर योजनाबद्ध विकास, वित्तीय अनुशासन और उत्पादन-अधारित कार्य देगा, जबकि आलोचक कहते हैं कि यह मूल रोजगार अधिकार को कमजोर कर सकता है।
निष्कर्ष
MGNREGA 2026 में हुए नए बदलाव भारत की ग्रामीण रोजगार नीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकते हैं। सरकार ने योजना को नया रूप देकर इसे VB-G RAM G योजना के अंतर्गत अधिक संगठित, डिजिटल और विकास-केंद्रित बनाने की कोशिश की है। रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन करना, साप्ताहिक भुगतान, और ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देना सकारात्मक कदम माने जा सकते हैं।
हालाँकि, दूसरी ओर केंद्र–राज्य खर्च साझेदारी (60:40) और कृषि मौसम में काम रोकने जैसे प्रावधानों को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। आलोचकों का मानना है कि इससे गरीब ग्रामीण परिवारों के रोजगार के अधिकार पर असर पड़ सकता है, जबकि सरकार इसे विकसित भारत 2047 की दिशा में जरूरी सुधार बता रही है।
कुल मिलाकर, MGNREGA 2026 के ये बदलाव तभी सफल माने जाएंगे जब उनका सही और पारदर्शी क्रियान्वयन होगा और वास्तव में ग्रामीण मजदूरों को समय पर काम व भुगतान मिलेगा। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि नई व्यवस्था ग्रामीण गरीबी कम करने में कितनी कारगर साबित होती है।
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